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पता नहीं दिलों से खेलना शौक है उनकी या आदत,
पता नहीं दिलों को तोड़ना मज़बूरी है उनकी या फिदरत।
जो भी हो हमारा दिल तोड़ने को तो नहीं दिया था,
हमने उन्हें अपना दिल खेलने को तो नहीं दिया था।

पर उन्हें क्या जो करना था आकर दिया,
हमें उम्र भर रोने को तनहा छोड़ दिया।
जब भी कोशिश करता हूँ उसे भूलने की नाकामी ही हाथ लगती है,
जितनी कोशिश करता हूँ उसे दिल से निकालने की उतना ही उसकी याद सताती है।

क्या करूँ कुछ समझ नहीं आता,
रोना चाहता हूँ पर रो नहीं पता,
हंसना तो भूल ही गए है, अब तो मुस्कुराना भी नहीं आता।
चाह कर भी मैं उसे भूल नहीं पाटा,
वो नहीं समझती मेरे प्यार को जानता हूँ मैं,
फिर भी जाने क्यों अपने दिल को मैं समझा नहीं पता।